चम्बा मंसूरी से 60 किलोमीटर और नरेन्द्र नगर से 48 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान समुद्र तल से 1676 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

चम्बा मंसूरी से 60 किलोमीटर और नरेन्द्र नगर से 48 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान समुद्र तल से 1676 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से बर्फ से ढके हिमालय पर्वत और भागीरथी घाटी का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता है। चम्बा अपने स्वादिष्ट सेबों के लिए भी प्रसिद्ध है। यह स्थान देवप्रयाग से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चंद्रबदनी पंहुचने के लिये आपको देवप्रयाग से जामनी खाल होते हुये नैखरि एवम् जुराना बैन्ड तक गाडी मे जाना होगा। यह एक रमनीक स्थल भी है,उत्तराखन्ड मे माता के तीन सिधपीठ -सुरकंडा, कुन्जापुरि एवम् चन्द्रबदनी है, जिनके दर्शन आप उपरोक्त तीनो मे से किसी एक मन्दिर मे खडे होकर कर सकते हो, ऐसा माना जाता है कि राजा दक्ष द्वारा भगवान शिव को यज्ञ में न बुलाने के कारण माता सती ने यज्ञ कुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। इसके पश्चात् भगवान शिव ने सती को हवन कुंड से निकाल कर अपने कंधों पर रख लिया। इस प्रकार वह कई वर्षो तक सती को लेकर इधर-उधर घूमते रहे। इसके बाद भगवान विष्णु ने माता सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र द्वारा 52 हिस्सों में कांट दिया। माता सती के शरीर का (बदन) हिस्सा चन्द्रबदनी के नाम से,सिर का हिस्सा सुरकन्डा के नाम से तथा घुटने(गुन्जे)कुन्जापुरी के नाम से प्रसिद्ध हो गये। मंदिर के आसपास कई अन्य छोट-छोटे मंदिर भी है। प्रत्येक वर्ष नवरात्रो में इस स्थान पर बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है।पहले किसी समय यहॉ पर बलि प्रथा का बडा चलन था जिसमे भैसा तथा बकरे का बलीदान दिया जाता था,स्वामी (स्व॰) मनमथन के अथक प्रयासो से इस प्रचलन को बन्द करवाया गया, आप पैदल यात्रा से भी यहॉ जा सकते है, मा चन्द्र्बदनी के चरणो मे बसा एक छोठा सा कस्वा है अन्जनी सैण जिससे २ किमी की दूरी पर स्थित है कैथोली गॉव यहॉ से आप चोखाल के रास्ते पैदल चन्द्रबदनी के लिये अपनी यात्रा शुरु कर सकते है।

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